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Tuesday, 23 August 2011

अधूरी बातों को सुनने कभी तो आओ ...........

किसी एक इन्सान के चले जाने से इतना खालीपन क्यूँ महसूस होता है," उसके अलावासब कुछ अपने पास होते हुए भी  ऐसा क्यूँ लगता है की ..." कुछ कमी सी है...." क्यूँ कभी उसे भूलने को जी नहीं चाहता है.... हमेशा ऐसा क्यूँ  लगता है कि...... मुझे उसे जाने नहीं देना था..............

बिखरे सपनो को संजोये , जगती रातें रह गयी है
कुछ धुंधली सी ही सही , मीठी यादें रह गयी है
कुछ बचा है, अब भी, अनकहा अनसुना सा 
कपकपाते लबो पे कुछ बातें रह गयी.........

अधूरी बातों को सुनने कभी तो आओ
कहना था कि जी नहीं सकते मत जाओ 
वो शब्द जो आके अटके है मेरे लबो पे
उन्हें पढो, समझो please   रुक जाओ

अब जब कि जा चुकी हो मेरे जीवन से
फिर क्यूँ तड़प रहा हु मै, बिछोह कि जलन से
कुछ रास्ता बताओ तुम, तुम तो बुद्धिमान थी 
बोलो भला मिटाऊ कैसे , अंतर्मन से  

 हां,  कहा था वक़्त कि भूल जाऊंगा 
उन रास्तो पे वापस कभी ना आऊंगा 
पर लौटना कभी तुम, एक बार उन राहों से
मै अब भी वही खड़ा हु, मै कहाँ जाऊंगा

मेरे शेर डुबे है मेरी आहो में 
हर शब्द डूबा है कराहों में
मै नाउम्मीद हूँ , हर तरफ से, इक अहसास के सिवा 
कि, कभी तो आओगी तुम मेरी बाँहों में

तेरी सासों में उलझी वो मेरी सासें रह गयी है
जेहन में अब भी, वो बोलती आँखे रह गयी है
इक पल मुझे भी बख्शो कभी तो फुर्सत के
सुनो अधूरी, अनकही जो बातें रह गयी है.....................