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Sunday, 21 February 2010

बस मैं रंग भरूँगा ..............

मैंने ये कविता अपनी बहन के लिए लिखी थी ,ये  एक वादा था मेरा उससे इन पंकित्यों के माध्यम से ,और एक ऊमीद भी कि एक दिन सबकुछ ठीक हो जायेगा, अपनी जिंदगी को हम एक दिन अपनी उँगलियों पे नचाएंगे .....................

जीवन के इस रस्ते पर तेरे संग चलूँगा
तू सपने देखती जाना, बस मे रंग भरूँगा
सोचना ना ये कभी की तू तन्हा अकेली है
उदासी के क्षणों मे भी मैं उमंग भरूँगा .

ना कर अफ़सोस उस वक़्त पे , जो गुजरता जा रहा है
आने वाला कल तेरा , खुशियों से नहा रहा है
खड़ी हो जा दरवाजे पर तू स्वागत कर बाहें फैला
कि रात स्याह बीत रही है , नया सवेरा आ रहा है

दुआ कर खुदा से के ऐसा वक़्त आये जरूर
फक्र हो तुझे मुझपे भी , रिश्तों पर आये गुरूर
चल खुदा से साथ साथ ये दुआ भी मांग ले
कि रगड़े चिराग तू, मैं निकलू , और पूछु क्या है हुक्म हुजुर .

जितनी मर्जी तू पावं फैला , चादर मे सिलूँगा
तू सपने देखती जाना , बस मैं रंग भरूँगा ..............................

 




5 comments:

  1. sach main yaar bahut achha likhte ho...

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  2. itna hi bolungi k kash aap such me mere bhaiya hote..........................

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  3. grt yaar.. "jitni marzi paav faila, chaadar me silunga".. too good

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  4. its nice....wishes for you....
    "BHAGINI SNEH KE AANCHAL MEIN,
    TU HIMMAT HAMESHA PAYEGA.
    KAANTE BHARI HO RAAH CHAHE,
    TU CHALTA HI JAYEGA.
    EK BAAR KOSHISH TO KAR,
    TU SURAJ SE BHI NAZAR MILAYEGA."

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