Pages

Monday, 22 February 2010

कौन साथ चलता हैं यहाँ ......

बचपन से सुना करते थें कि हम अकेले आते हैं  और अकेले ही जातें हैं , और अब जब थोड़ी समझदारी हुई तो पता नही क्यों इन बातों पर यकीन करने को दिल करता हैं. सच ही तो हैं, और मुझे तो लगता है कि हम ताउम्र  अकेले ही होते है अपने गम और खुशियों मे..... 

कौन साथ चलता हैं यहाँ , उम्रभर के लिए
ये रहबर*( रस्ते का साथी) , ये रहबर सुकून आँखों के तसल्ली है नजर  के लिए..

आज यहाँ ठहरे तो मुलाकात हो गई
कौन जाने कल हम चल देंगे किधर के लिए..

जो नेमते थी , खर्च दी यारों की मुस्कानों पे
अब बचा ही क्या है पास मेरे फिकर के लिए..

ना इबादत की जरुरत है, ना सजदा करो मेरे यारों
एक दुआ ही काफी है मुझे , असर के लिए ..

ना थमाओ रिश्तों की डोर, मैं थम ना सकूंगा
जो है, बहुत हैं , एक ऊमर के लिए ..

दूर करलो आज ही  गिले, शिकवे, शिकायतें
क्या पता फिर वक़्त ना मिले , अगर मगर के लिए ..

जो चुभने लगूं मैं आँखों में, तो खुद हे चला जाऊंगा
क्यों खर्च करोगे दो पैसे , जहर के लिए.............

8 comments:

  1. na aason baha mere yar unke liye,
    jo pal mein hai sath or pal mein hote juda hai
    chahat kar ussse jo har pal tere karib hai......
    or koi nhi yara wo to bas khuda hai....

    ReplyDelete
  2. really dil chune wali kavita hai dost..keep it up


    sankar-shah.blogspot.com

    ReplyDelete
  3. bahut wide soch hai aapki.....

    ReplyDelete
  4. जो चुभने लगूं मैं आँखों में, तो खुद हे चला जाऊंगा
    क्यों खर्च करोगे दो पैसे , जहर के लिए.............

    too good!!!

    ReplyDelete
  5. Thank you for your comments................

    ReplyDelete
  6. last line... too good

    ReplyDelete
  7. nice poem.....this is for you nikhil... "UMAR BHAR KA KAHO KAISE,
    HISAAB RAKKHA JAYE.
    KYA MAJAAL JO KOI VISHAAD,
    HUMAARE JIVAN SE BACH KAR CHALA JAYE.
    HUM TO KHUD KI AANKHON MEIN CHUBHNE LAGE HAIN, BOLO KHUD SE BACH KAR KAHAAN JAYEN."

    ReplyDelete
  8. आज यहाँ ठहरे तो मुलाकात हो गई
    कौन जाने कल हम चल देंगे किधर के लिए..

    mujhe nhi lagta ye sahi likha hua hai

    ReplyDelete