उमंगो के तूफान को ..दिल में को दबाये बैठे थे
हमें लगा था हम..कुछ छुपाये बैठे थे .....
उन के आँखों में डूबने का शौक था हमें
और वो ,.... नजरे झुकाए बैठे थे.......
पर वो.. खुद में ही.... सिमटे समाये बैठे थे...
ख़ामोशी को फासले का नाम दे दिया
अरे हम तो... पलके बिछाए बैठे थे ....
उनके बिना जीना मुमकिन नहीं है अब
और हम उन से ही... गुस्साए बैठे थे?...
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