सपनो और हकीकत कि लड़ाई में फिर एक बार एक सपना हार गया , एक कहानी और खत्म हो गयी...... कभी नजदीकिया इतनी थी कि उनकी धड़कनो का संगीत भी सुनाई देता था और आज..... कुछ नहीं बचा.…बस कुछ अहसाह बाकी रह गये..... कुछ यादें बाकी रह गयी.
मेरी सासों में तेरी खुशबु, तेरा अहसास बाकी है
मेरी सासों में तेरी खुशबु, तेरा अहसास बाकी है
न बुझ सकी थी जो कभी, वो प्यास
बाकी है
मेरे महबूब , मुझे फिर वो रात अता करना***
मेरे हिस्से में अब भी , वो एक
रात बाकी है
वो मोम सा पिघलता जिस्म, वो फूलती सासें
वो बिखरी बिखरी जुल्फे और प्यार की
बातें
वो फुल से शब्द, जो, हवाओं में बिखरे
थे
उन शब्दो की अब भी वो,
मिठास बाकी है
मेरे महबूब , मुझे फिर वो रात अता करना
मेरे हिस्से में अब भी , वो एक रात बाकी है
वो अधखुले से होठ, वो अधखुली आँखे
कुछ पिसती हुए कलियाँ और सिलवटे ही
सिलवटे
जिन सिलवटो के बीच खोये पड़े थे हम
तुम आओगी वापस, उनकी, ये आस
बाकी है
मेरे महबूब , मुझे फिर वो रात अता करना
मेरे हिस्से में अब भी , वो एक रात बाकी है
यूँ सिमटी थी बाँहों में, तुम, बहकी नदी सी
उस नदी की अब भी मुझे, तलाश बाकी है
तपिश उस रात की, क्या कहे,बस यु समझ लो
लबो पे रक्खा था जो अंगारा, उसकी आग
बाकी है
मेरे महबूब , मुझे फिर वो रात अता करना
मेरे हिस्से में अब भी , वो एक रात बाकी है जिन्दगी, गयी , तेरे साथ मेरे हमदम
अब तो बस ,चलती फिरती ,लाश बाकी है
मेरे महबूब मुझे फिर वो रात अता करना
मेरे हिस्से में अब भी ,वो एक
रात बाकी है……
*** (अता करना मतलब देना)
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